कामेडी सीरियल ‘मे आई कम इन मैडम’

दफ्तर में काम करने के दौरान किसी मातहत को मालकिन ज्यादा लिफ्ट देने लगे तो बहुत झंझट पैदा हो जाते मालकिन के दिमाग में कुछ हो ना हो, लेकिन मातहत को गलतफहमी ज़रूर हो जाती है.  ये गलतफहमी क्या गुल खिलाती है और क्या नहीं कराती इसके जवाब ले कर आ रहा है एक नया कामेडी सीरियल.

LIFEOK टीवी पर इस मजेदार कामेडी सीरियल ‘मे आई कम इन मैडम’ का प्रसारण कल सात मार्च रात 9:30 से यानि  सोमवार से शुक्रवार लगातार किया जाएगा. मुम्बई स्थित मेरे मित्रों ने बताया कि फिलहाल कुछ कड़ियों तक उत्तर प्रदेश के थियेटर आर्टिस्ट संदीप यादव को लेने का कोई निर्णय नहीं हो पाया है. बाद में होगा या नहीं अभी कहा नहीं जा सकता. इस सीरियल के कुछ दृश्यों के चित्र मैंने ख़ास तौर से हासिल किये हैं. आपके मनोरंजन के लिए प्रस्तुत हैं.

में आई कम इन मैडम7  प्रोड्यूसर बिनाफ़र कोहली और संजय कोहली और आपके चहेते ‘भाभीजी घर पर ..’ वाले आपके चेहेते शशांक बाली ने इस सीरियल में रघुवीर शेखावत और मनोज संतोषी की मजेदार कहानियों को यूं पिरोया है कि एक कड़ी देखने के बाद ही आपको बाकी कड़ियों का इंतज़ार रहेगा. इस सीरियल की मुख्य आकर्षण खूबसूरत अभिनेत्री नेहा पेंडसे हैं जो मैडम बनी हैं.

सीरियल के नायक बने अनूप उपाध्याय को आप कई सीरियलों में देख चुके हैं. इस सीरियल में वह एक विवाहित पुरुष दिखाए गए हैं और उनकी पत्नी बनी हैं सपना जो आंचलिक फिल्मों में बड़ा नाम मानी जाते हैं. उनकी भाषा ही आपको वैसे ही गुद्गुदायेगी जैसे ‘भाभी जी..’ की अंगूरी की अटपटी भाषा मज़ा देती है. लेकिन अंगूरी की तरह ‘सही पकडे हैं’ तकिया कलाम नहीं है सपना का. सपना एक अटपटी और समझ में ना आनेवाली बीवी के अवतार में हैं.

एक पात्र और आपको पहचाना लगेगा जो ‘भाभी जी..’ में तिवारी जी की अम्मा बनी हैं. अरे वही टेलीफोन पर बतियाते हुए घर के नीचे की मंजिल पर हर बार गलती से कोई ना कोई सामान गिरानेवाली ममतामयी सास.  और हाँ इस सीरियल में भूतों से भी पंगा लिया गया है.  

इस सीरियल में पहले से ही कामेडी के बेताज बादशाह लेखकों में शुमार हो चुके मनोज संतोषी के अनुभव और मंजे हुए लेखक रघुवीर शेखावत की कहानियाँ  अप्रत्याशित ढंग से रोचक घटनाक्रम को समेटे आगे बढ़तीं हैं. जिन लोगों को ‘भाभीजी घर पर..’ के संवाद ‘सही पकडे हैं’, ‘आई लाइक इट’ और ‘दादा रे..’  खूब पसंद आये हैं उनके लिए नए ज़माने के नए मुहावरे लेकर आया है ये सीरियल.

नौकरीपेशा इंसान की रोजमर्रा की भागदौड़ और बड़े लोगों के लिए सिर्फ दिल बहलाने के लिए की गयीं हरकतों के साथ ही ये सीरियल कुछ गंभीर सवाल भी अपने कथानक में छिपाए है. नौकरी पेशा व्यक्तियों को अटपटी परिस्थितियों में क्या करना चाहिए? बॉस को खुश करना कहाँ तक जायज़ है? क्या अंधविश्वासों पर यकीन करना चाहिए? देशप्रेम क्या केवल नेताओं की ही बपौती है? ये बात और है कि इन सवालों के जवाब आपको एक साथ ही घुट्टी बना कर नहीं पिलाए गए हैं. चुटीली टिप्पणियों में गंभीर से गंभीर बात कह दी गयी है.

ये सीरियल उत्तर प्रदेश और लखनऊ की प्रष्ठभूमि पर है मगर मुझे यह बताते हुए बेहद अफ़सोस है कि “भाभी जी घर पर हैं ” का हमारा मासूम-और राजकपूर की याद दिलानेवाला उत्तर प्रदेश का थियेटर आर्टिस्ट आपका प्यारा सब्जीवाला Sandeep Yaadav आपको बहुत जल्दी तो नज़र आने वाला नहीं.

About Ashok Kumar Sharma

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