मौजूदा हालात पर नवगीत :

आज़ादी का तिलिस्म, कुछ तो है उसके पास
घोड़ा है सियासत का वो, प्यारी है उसे घास
 
हिन्दोस्ताँ की हिफाजत, अब है नहीं आसाँ
इल्मी इदारे कहते हैं, अफ़जल है उनके पास
 
नसबंदी, इमरजैंसी और घोटालों के मुजरिम
मजमे लगा के कहते, हो हिन्दोस्तां का नास
 
खतरे में नज़र आता है, इस मुल्क का वजूद
खुद रहबरों ने सौंप दी, है रहजनों को रास
 
दिखता नहीं किसी को, आया ये कैसे माल
बदहाल बेचारे थे कल, अब क्या नहीं है पास
 
भस्मासुरों को पाल कर, फिर सत्ता की उम्मीद
सिस्टम को फेल करते, जो अब तक हुए ना पास
 
-‘अक्स’ अलीग

 
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उर्दू शब्दों के भाव
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तिलिस्म = तंत्र जाल, चमत्कार, जादू
इल्मी= ज्ञान के, अध्ययन के, शिक्षण संबंधी
इदारे= संस्थान, जगहें, संगठन
मजमे= तमाशबीनों का जमघट, दर्शकों का झुण्ड
वजूद= अस्तित्व
रहबर= नेता (यहाँ गलत नेताओं से तात्पर्य है)
रहजन= लुटेरे (बाहरी तत्व, देशद्रोहियों से आशय है)
भस्मासुर= किसी भी वस्तु को जलाकर राख करनेवाला राक्षस
 
आशय
1-घोड़ा और घास की मैत्री कभी संभव नहीं ये अभिव्यन्ज्जना है इस रचना में
2-JNU विवाद/वाकयुद्ध अफजल को शहीद और न्यायपालिका को कातिल बताने की सभा से शुरू हुआ था. वह मुद्दा किसीकोयादनहींहै. टीवी चैनलों को ख़ासतौर से
3- विश्वविद्यालयों का काम बाकायदा चुनी हुई सरकारों को पलटना नहीं है
4- कांग्रेस नेतृत्व समेत सभी प्रतिपक्षी पार्टियों को को आम चुनावों में जनता के हाथों बेहद शर्मनाक पराजय मिली है उनके पास कोई मुद्दा न होते हुए भी, वे मीडिया की मदद से अस्तित्वहीन लोगों को नायक बना करअस्थिरता के खेल में जुटी हैं. नेताओं ने अब अपने कार्यक्रमों से जनता को जोड़ने के बजाय, लोगों को बांटने का खेल शुरू किया है
5- बदहाल और बेहद गरीब कहलानेवाले छात्र नेताओं के पास एसयूवीगाड़ियों के काफिले और वकीलों की फ़ौज पर खर्च करने का धन कहाँ से आ रहा है?

About Ashok Kumar Sharma

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