शहंशाही गाली कला

akbar1शहंशाह अकबर के ज़माने की बात है ।

अकबर के नवरत्नों में से एक थे अब्दुल मोमिन । उनके बहुत ज्यादा प्याज खाने की वजह से शहंशाह अकबर ने उनको ‘मुल्ला दो प्याजा‘ का खिताब दे डाला था।

मुल्ला के रहन सहन और शौकों बारे में बहुत अजीब अजीब और अश्लील बातें कही जातीं थीं। कोई उनके किसी ‘ख़ास’ शौक को लेकर उनको ‘जनाना’ कहता तो कोई उनको चुगलखोर चापलूस । शहंशाह हुमायूं के वक्त हिन्दुस्तान आया, मुल्ला हिन्दुओं से बेहद नफरत करता था। अकबर के हिन्दुओं से संबंधों के कारण मुल्ला अपनी नफरत को बहुत जाहिर नहीं करता था । लेकिन मौक़ा पड़ते ही वह बीरबल को किसी ना किसी अपमानजनक परिस्थिति में फंसाने में लगा रहता था ।

बादशाह के ख़ास मनसबदारों और दरबारियों की किसी महफ़िल में एक मौके पर मुल्ला दो प्याजा द्वारा हिन्दुओं को कायर और घटिया कहे जाने पर एक राजपूत सेनापति पृथीपाल (असली नाम पृथ्वीपाल होगा) ने मुल्ला की तुलना सूअर से कर दी ।

मुल्ला भी अकबर के कम चहेते ना थे I वह शिकायत लेकर अकबर के सामने पेश हुए I Mulla-do-piazza(1)

चतुर अकबर ने इसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद मानकर राजा मानसिंह से सलाह लेनी चाही । उन्होंने समझदारी दिखाते हुए कहा कि राजा टोडरमल को क़ानून की ज्यादा जानकारी है । राजा टोडरमल भी कन्नी काट गए। उन्होंने कहा कि राजा बीरबल से बेमिसाल राय मिलेगी । राजा बीरबल की भी मुल्ला से नहीं बनती थी। कई दरबारी तो यह सोच कर खुश थे कि अब बीरबल फंस ही गया ।

अकबर से बीरबल ने पूछा “जहाँपनाह, राय दूं, या फैसला ?”

अकबर भी समझता था कि बीरबल सार्वजनिक तौर पर नाइंसाफी तो कर ही नहीं पायेंगा । उसने कहा, आपका कहा हमारा हुक्म माना जाएगा । उस पर बेशक अमल होगा । अगर खुद हमको नामुनासिब लगा तब ही हम दखल करेंगे ।तब आपको सज़ा मिलेगी बीरबल ।

बीरबल ने मुक़दमे की कार्रवाई शुरू की । पूछा ” मुल्ला हुज़ूर फरमाइए पृथीपाल ने कितना नशा कर रखा था?”

गुस्से में भन्नाए मुल्ला ने बिना सोचे कहा, ” कम से कम दस प्याले !”

“ मुल्ला हुज़ूर को फ़ौरन से पेश्तर दस प्याले शाही अंगूरी पेश की जाए ।” बीरबल ने ऐलान किया ।

अकबर ने सहमति में सर हिलाया, मगर पूछा “ यह हुक्म क्यों बीरबल?”

बीरबल बोला, “क़ानून है खून का बदला खून । इसलिए नशे में गाली का बदला नशे में गाली दिलवा कर दिया जाएगा” ।

birbal-leadशाही अंगूरी मुल्ला के सामने पेश की गयी । बीरबल ने मुल्ला से पूछा, “ मियां हुज़ूर, आपको यकीन है कि दस प्याले के बाद आप सिर्फ पृथीपाल को ही गालियाँ देंगे ? क्योंकि आप इजलास में हैं और अगर आपने एक लफ्ज भी पृथीपाल के बजे किसी और को कह दिया तो आपको बादशाह हुज़ूर से सामने बेअदबी की बहुत कड़ी सज़ा मिलेगी ।“

दबी जुबान में मिमियाते हुए मुल्ला ने पूछा, “राजा बीरबल, मैं इनको मुआफ करता हूँ ।“

बीरबल ने मुल्ला से फिर पूछा, “ मुल्ला ये फरमाइए कि आप शाही अंगूरी के दस प्याले पीने से क्यों बाख रहे हैं ? क्या आपको ये लगता है कि मदहोशी के आलम में आप शहंशाह को औल-फौल कह सकते हैं?”

मुल्ला दो प्याज़ा ने कहा , “नशा तो नशा है !”

बीरबल ने ऐलानिया कहा, “जिल्लेसुभानी जो इंसान मदहोशी में हुज़ूर की शान में भी गुस्ताखी कर सकता है, उसे पृथीपाल ने जो कहा वो कम है क्या ?”

अकबर मुस्कुराया और बोला, सब लोग गौर फरमाएं  “राजा बीरबल ने शाही इजलास में मुंसिफ के बतौर अच्छा काम किया और ये दिखाया कि होशमंदी रखी जाए तो किसी को कानून की हदों में रह कर भी गाली दी जा सकती है ।

बाद में शहंशाह अकबर ने मुल्ला दो प्याजा को आगरा से दूर लाहौर का किलेदार (गवर्नर) बना कर भेजने का हुक्म  भी जारी कर दिया । मुल्ला  को किसी ने आगरा और फतेहपुर सीकरी में दोबारा नहीं देखा ।

 

 

About Ashok Kumar Sharma

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