Category Archives: गज़ल

बांस की शान में : (कविता)

tree_bamboo

डंडा, लाठी और बाँस आज तुम कहाते हो
अबे ओ बांस, फिर भी बेवजह इतराते हो
खपच्ची रूप तुम्हारा पतंग को प्यारा है
सूप बनकर के कभी कृष्ण को भी तारा है
 
शिव धनुष की वो अद्भुत कमान तुम्ही थे  bansuri1455437897_big
राम के बाणों की असली उड़ान तुम्ही थे
 
कभी बलदाऊ ने मुगदर तुम्हें बनाया था
कृष्ण की बांसुरी की मधुर तान तुम्ही थे
 
बांस से ही तो शब्द ‘वंश’ चलन पाया था
बंसीधर कृष्ण के उस नाम में भी तुम्ही थे
 डलिया बनकर के शिवाजी के काम आये थे
Celebration-14909 Barsanaeतुम्हारे बल पे कभी झंडे सब फहराए थे
 
बुंदेलों-हरबोलों की वो आन बान तुमसे थी
और मथुरा में लठामार होली तुमसे थी
 
गरीब गुरबा के छप्पर की शान तुम्ही हो
सुहागनों के मंडपों की जान तुम ही हो
 
लेखनी बनके तुम्ही ने सृजन कराया है
और पिस-पिसके तुमने पुस्तकों को जाया है
 
शक्तिवर्धक दवाओं में काम आते हो
अर्थी में लग के अंत साथ में ही जाते हो
 
ज़रा सोचो तुम्हारी गत क्या बन गयी यारों
कभी सीढ़ी हुआ करते थे, याद है प्यारों ?
                                                                                       झाडू के तिनकों ने सत्ता में दम दिखलाया है
लाठी का युग भी असल में अभी-ही आया है
 
बांस भैया, ये नया युग है खुद को कुछ बदलो
दिन सुधर जायेंगे सत्ता में कहीं तो घुस लो
-अक्स अलीग
मजदूर दिवस, 2016
FB_20150707_18_00_18_Saved_Picture

मौजूदा हालात पर नवगीत :

आज़ादी का तिलिस्म, कुछ तो है उसके पास
घोड़ा है सियासत का वो, प्यारी है उसे घास
 
हिन्दोस्ताँ की हिफाजत, अब है नहीं आसाँ
इल्मी इदारे कहते हैं, अफ़जल है उनके पास
 
नसबंदी, इमरजैंसी और घोटालों के मुजरिम
मजमे लगा के कहते, हो हिन्दोस्तां का नास
 
खतरे में नज़र आता है, इस मुल्क का वजूद
खुद रहबरों ने सौंप दी, है रहजनों को रास
 
दिखता नहीं किसी को, आया ये कैसे माल
बदहाल बेचारे थे कल, अब क्या नहीं है पास
 
भस्मासुरों को पाल कर, फिर सत्ता की उम्मीद
सिस्टम को फेल करते, जो अब तक हुए ना पास
 
-‘अक्स’ अलीग

Continue reading मौजूदा हालात पर नवगीत :