Category Archives: दुर्लभ कथाएं

कोकरोच का दूध भविष्य का सुपरफूड

रोच दूध

पूरी दुनिया में धूम मचानेवाली एक रिसर्च में पता चला है कि गाय, भैंस, बकरी और ऊँटनी  किसी के दूध में उतनी ताकत नहीं है जितनी कि एक ख़ास किस्म के काक्रोच के दूध में होती है I ये दूध ख़राब भी नहीं होता और बच्चों में मोटापा भी नहीं लाता I दरअसल पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस समय हिन्दुस्तान में इसी सप्ताह हुई एक रिसर्च के नतीजों से हैरत में हैं । मुमकिन है ये खबर आप अखबारों में भी पढ़ लें । नहीं तो ढूंढ लीजियेगा । गूगल कर लीजिएगा ।

लोबिया जैसे छोटे आकार के, प्रशांत महासागर क्षेत्र के तकरीबन सभी देशों में घर घर पाए जानेवाले कोकरोच, डिपप्लोप्तेरा पंकटाटा (Diploptera punctata), की खासियत यह है कि वह अंडे नहीं देते बल्कि पूर्ण विकसित शिशुओं को जन्म देते हैं ।  माता के गर्भ में पनप रहे सभी लारवा अपनी माता की गर्भ थैली में पैदा होनेवाले एक तरह के दूध जैसे पदार्थ पर ही जिन्दा रहते हैं ।

बच्चे पैदा करनेवाले कोकरोच के वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान इन्डियन इंस्टिट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलोजी एंड रीजनरेटिव मेडिसिन के वैज्ञानिकों के एक दल ने कोकरोच के भीतर पाए जानेवाले उस दुग्ध जैसे स्राव की यह जानने के लिए जांच पड़ताल शुरु कर दी कि इंसानों और अन्य विकसित जंतुओं की तरह विकसित बच्चे पैदा करनेवाली माता कोकरोच के भीतर उत्पन्न उस दुग्ध के संघटक प्रोटीन्स की संरचना भी क्या स्तनधारियों के दूध से मिलती जुलती है । 2385527094_f4cd305090_b

इस खोजबीन में इन वैज्ञानिकों को यह चौंकानेवाला तथ्य पता चला कि मादा डिपप्लोप्तेरा पंकटाटा कोकरोच का दूध संसार के किसी भी पोषक पदार्थ से ज्यादा ताकतवर प्रोटीन है । यह प्रोटीन गौवंशीय दूध से तीन गुना अधिक कैलोरी संपन्न है और लम्बे समय तक रखे रहने पर भी कतई खराब नहीं होता । इस दूध के भीतर जितने पोषक तत्व हैं उतने किसी भी प्राणी के दूध में आज तक नहीं पाए गए हैं । इसी कारण जैव वैज्ञानिकों द्वारा यह माना जा रहा है कि यदि  सही तरह से इस प्रोटीन को प्रयोगशाला में बनाया जाए या किसी और तरीके से संग्रहीत किया जाए तो मादा कोकरोच का यह दूध भविष्य में परमाणु युद्ध के कारण विकिरण से संभावित विनाश, पर्यावरण प्रदूषण, तापमान की बढ़ोतरी और किसी भी प्रकार खाद्यान्न संकट पैदा होने पर मानव जाति को ज़िंदा रखने के काम आयेगा ।

इस शोध दल के एक सदस्य वैज्ञानिक डॉ. एस बनर्जी के अनुसार, “मादा कोकरोच के इस दूध में पर्याप्त प्रोटीन, अमीनो एसिड्स, चिकनाई और चीनी होते हैं। भविष्य में इस दूध का प्रयोगशालाओं में उत्पादन बिना किसी कोकरोच के किया जा सकेगा” ।

 इसी शोध अध्ययन के दूसरे वैज्ञानिक डॉ. सुब्रमन्यन रामास्वामी के अनुसार, “ यह दूध आसानी से ख़राब भी नहीं होता । इस पर 57 दिन चले अध्ययन में भी रेडियो एक्टिविटी का भी असर होता नहीं दिखा है” ।

 इस शोध अध्ययन पर दुनिया भर के वैज्ञानिक निगाह गडाये हुए हैं । ख़ास तौर से चीन, कोरिया, मंगोलिया, जापान तथा थाईलैंड के वैज्ञानिक इस शोध को आगे बढ़ने में लग गए हैं ।  उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही हिन्दुस्तानी वैज्ञानिकों की इस टीम को नोबेल पुरस्कार भी मिल सकता है ।

और जानकारी चाहें और इस खबर पर यकीन ना हो तो  इस रिसर्च से सम्बंधित यह वीडियो भी देखिये I

https://www.instem.res.in/content/solving-structure-insect-milk-proteins

 

फ़ौजी का पिछवाड़ा

एक कश्मीरी, टीवी रिपोर्टर और हिन्दुस्तानी सेना के हवलदार अक्स अलीग को आतंकियों ने पकड़ लिया. गला रेत कर मौत की सज़ा देने से पहले आतंकियों के लीडर ने उनकी आख़िरी इच्छा पूछी गयी.
कश्मीरी ने कहा दो प्लेट गर्मागर्म कबाब खाऊंगा.
टीवी रिपोर्टर बोली जहाँ गला काटा जाना है वहां का फुटेज मैं शूट करके अपने ऑफिस ट्रान्सफर करूंगी ताकि मेरे दोस्तों को पता चले मैंने आख़िरी वक्त तक काम किया.
हवलदार अक्स अलीग बोले, सरकार मेरे पिछवाड़े पर ऐसी लात मारिये कि मैं फ़ुटबाल की तरह सामने जाकर गिरूँ.
कश्मीरी को कबाब खाने को मिल गए . बोला अब काटो गला. तैयार हूँ.
रिपोर्टर का आख़िरी टेप दिल्ली ट्रान्सफर हो गया. कटे बाल सहला कर शान से बोली अब काटो गला. तैयार हूँ.
सबसे आखिर में हवलदार अक्स अलीग के पिछवाड़े आतंकियों के लीडर ने ज़ोरदार लात मारी. वह काफी दूर जाकर औंधे मुंह गिरा. और अगले ही पल कहीं छिपाई हुई रिवाल्वर निकाल कर आतंकियों के लीडर का भेजा उड़ा डाला. बची हुई गोलियों से उसने साथ खड़े तीन और आतंकी उड़ा डाले. भगदड़ मचते ही उनकी एके 47 उठाकर बाकी आतंकियों को उड़ा डाला.
लाशों के बीच बचते बचाते बाहर जाते समय कश्मीरी और टीवी रिपोर्टर ने हिन्दुस्तानी फ़ौजी से पूछा आप आसानी से इन हरामजादों को पहले ही मार सकते थे, फिर हमारी अंतिम इच्छा पूरी होने के बाद और अपने पिछवाड़े पे लात क्यों खाई? सीधे शूट क्यों नहीं करते इन हरामखोरों को?
शायराना अंदाज़ में हवलदार अक्स अलीग ने कहा, “देते जो सज़ा यूं ही, ये कहते आप सब ही, कश्मीरियों पे ज़ुल्म ढा रहे हैं मिलिट्री वाले !”

शहंशाही गाली कला

akbar1शहंशाह अकबर के ज़माने की बात है ।

अकबर के नवरत्नों में से एक थे अब्दुल मोमिन । उनके बहुत ज्यादा प्याज खाने की वजह से शहंशाह अकबर ने उनको ‘मुल्ला दो प्याजा‘ का खिताब दे डाला था।

मुल्ला के रहन सहन और शौकों बारे में बहुत अजीब अजीब और अश्लील बातें कही जातीं थीं। कोई उनके किसी ‘ख़ास’ शौक को लेकर उनको ‘जनाना’ कहता तो कोई उनको चुगलखोर चापलूस । शहंशाह हुमायूं के वक्त हिन्दुस्तान आया, मुल्ला हिन्दुओं से बेहद नफरत करता था। अकबर के हिन्दुओं से संबंधों के कारण मुल्ला अपनी नफरत को बहुत जाहिर नहीं करता था । लेकिन मौक़ा पड़ते ही वह बीरबल को किसी ना किसी अपमानजनक परिस्थिति में फंसाने में लगा रहता था ।

बादशाह के ख़ास मनसबदारों और दरबारियों की किसी महफ़िल में एक मौके पर मुल्ला दो प्याजा द्वारा हिन्दुओं को कायर और घटिया कहे जाने पर एक राजपूत सेनापति पृथीपाल (असली नाम पृथ्वीपाल होगा) ने मुल्ला की तुलना सूअर से कर दी ।

मुल्ला भी अकबर के कम चहेते ना थे I वह शिकायत लेकर अकबर के सामने पेश हुए I Mulla-do-piazza(1)

चतुर अकबर ने इसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद मानकर राजा मानसिंह से सलाह लेनी चाही । उन्होंने समझदारी दिखाते हुए कहा कि राजा टोडरमल को क़ानून की ज्यादा जानकारी है । राजा टोडरमल भी कन्नी काट गए। उन्होंने कहा कि राजा बीरबल से बेमिसाल राय मिलेगी । राजा बीरबल की भी मुल्ला से नहीं बनती थी। कई दरबारी तो यह सोच कर खुश थे कि अब बीरबल फंस ही गया ।

अकबर से बीरबल ने पूछा “जहाँपनाह, राय दूं, या फैसला ?”

अकबर भी समझता था कि बीरबल सार्वजनिक तौर पर नाइंसाफी तो कर ही नहीं पायेंगा । उसने कहा, आपका कहा हमारा हुक्म माना जाएगा । उस पर बेशक अमल होगा । अगर खुद हमको नामुनासिब लगा तब ही हम दखल करेंगे ।तब आपको सज़ा मिलेगी बीरबल ।

बीरबल ने मुक़दमे की कार्रवाई शुरू की । पूछा ” मुल्ला हुज़ूर फरमाइए पृथीपाल ने कितना नशा कर रखा था?”

गुस्से में भन्नाए मुल्ला ने बिना सोचे कहा, ” कम से कम दस प्याले !”

“ मुल्ला हुज़ूर को फ़ौरन से पेश्तर दस प्याले शाही अंगूरी पेश की जाए ।” बीरबल ने ऐलान किया ।

अकबर ने सहमति में सर हिलाया, मगर पूछा “ यह हुक्म क्यों बीरबल?”

बीरबल बोला, “क़ानून है खून का बदला खून । इसलिए नशे में गाली का बदला नशे में गाली दिलवा कर दिया जाएगा” ।

birbal-leadशाही अंगूरी मुल्ला के सामने पेश की गयी । बीरबल ने मुल्ला से पूछा, “ मियां हुज़ूर, आपको यकीन है कि दस प्याले के बाद आप सिर्फ पृथीपाल को ही गालियाँ देंगे ? क्योंकि आप इजलास में हैं और अगर आपने एक लफ्ज भी पृथीपाल के बजे किसी और को कह दिया तो आपको बादशाह हुज़ूर से सामने बेअदबी की बहुत कड़ी सज़ा मिलेगी ।“

दबी जुबान में मिमियाते हुए मुल्ला ने पूछा, “राजा बीरबल, मैं इनको मुआफ करता हूँ ।“

बीरबल ने मुल्ला से फिर पूछा, “ मुल्ला ये फरमाइए कि आप शाही अंगूरी के दस प्याले पीने से क्यों बाख रहे हैं ? क्या आपको ये लगता है कि मदहोशी के आलम में आप शहंशाह को औल-फौल कह सकते हैं?”

मुल्ला दो प्याज़ा ने कहा , “नशा तो नशा है !”

बीरबल ने ऐलानिया कहा, “जिल्लेसुभानी जो इंसान मदहोशी में हुज़ूर की शान में भी गुस्ताखी कर सकता है, उसे पृथीपाल ने जो कहा वो कम है क्या ?”

अकबर मुस्कुराया और बोला, सब लोग गौर फरमाएं  “राजा बीरबल ने शाही इजलास में मुंसिफ के बतौर अच्छा काम किया और ये दिखाया कि होशमंदी रखी जाए तो किसी को कानून की हदों में रह कर भी गाली दी जा सकती है ।

बाद में शहंशाह अकबर ने मुल्ला दो प्याजा को आगरा से दूर लाहौर का किलेदार (गवर्नर) बना कर भेजने का हुक्म  भी जारी कर दिया । मुल्ला  को किसी ने आगरा और फतेहपुर सीकरी में दोबारा नहीं देखा ।