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फ़ौजी का पिछवाड़ा

एक कश्मीरी, टीवी रिपोर्टर और हिन्दुस्तानी सेना के हवलदार अक्स अलीग को आतंकियों ने पकड़ लिया. गला रेत कर मौत की सज़ा देने से पहले आतंकियों के लीडर ने उनकी आख़िरी इच्छा पूछी गयी.
कश्मीरी ने कहा दो प्लेट गर्मागर्म कबाब खाऊंगा.
टीवी रिपोर्टर बोली जहाँ गला काटा जाना है वहां का फुटेज मैं शूट करके अपने ऑफिस ट्रान्सफर करूंगी ताकि मेरे दोस्तों को पता चले मैंने आख़िरी वक्त तक काम किया.
हवलदार अक्स अलीग बोले, सरकार मेरे पिछवाड़े पर ऐसी लात मारिये कि मैं फ़ुटबाल की तरह सामने जाकर गिरूँ.
कश्मीरी को कबाब खाने को मिल गए . बोला अब काटो गला. तैयार हूँ.
रिपोर्टर का आख़िरी टेप दिल्ली ट्रान्सफर हो गया. कटे बाल सहला कर शान से बोली अब काटो गला. तैयार हूँ.
सबसे आखिर में हवलदार अक्स अलीग के पिछवाड़े आतंकियों के लीडर ने ज़ोरदार लात मारी. वह काफी दूर जाकर औंधे मुंह गिरा. और अगले ही पल कहीं छिपाई हुई रिवाल्वर निकाल कर आतंकियों के लीडर का भेजा उड़ा डाला. बची हुई गोलियों से उसने साथ खड़े तीन और आतंकी उड़ा डाले. भगदड़ मचते ही उनकी एके 47 उठाकर बाकी आतंकियों को उड़ा डाला.
लाशों के बीच बचते बचाते बाहर जाते समय कश्मीरी और टीवी रिपोर्टर ने हिन्दुस्तानी फ़ौजी से पूछा आप आसानी से इन हरामजादों को पहले ही मार सकते थे, फिर हमारी अंतिम इच्छा पूरी होने के बाद और अपने पिछवाड़े पे लात क्यों खाई? सीधे शूट क्यों नहीं करते इन हरामखोरों को?
शायराना अंदाज़ में हवलदार अक्स अलीग ने कहा, “देते जो सज़ा यूं ही, ये कहते आप सब ही, कश्मीरियों पे ज़ुल्म ढा रहे हैं मिलिट्री वाले !”

अकादमिक संस्थान

अकादमिक प्रतिष्ठा की रक्षा के उपाय

आतंकी संगठनों के बदले हुए एजेंडे, पडौसी देशों के बीच शीत युद्ध और आतंकी गुटों के भरती अभियानों को मनवांछित समर्थन ना मिलने के कारण उन्होंने अब अकादमिक संस्थानों को सीधे निशाना बनाना शुरू कर दिया है ।  पुराने समय से ही सियासी साजिशों को युवा शक्ति बहुत भाती है। सत्ताधारियों में ये होड़ चली आयी है किसके पास अधिक गुंडे, दबंग और युवा शक्ति होगी। युवाओं और छात्रों में अनुभव नहीं होता। एकता जबरदस्त होती है। वे मित्रों का अनुसरण करते हैं । एक को बहकालो तो उसके मित्रों की नेटवर्किंग से सबको उकसाना,  बरगलाना आसान है । वे बिना सवाल पूछे अनुकरण किया करते हैं । जल्दी ही मानवता के इतिहास का सबसे खतरनाक दौर शुरू हो सकता है, जिसमें हथियारों को थामने वाले हाथ भी आपके बच्चों के होंगे और उनका निशाना भी वे खुद ही होंगे ।

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